अनंत लहरों का कोलाहल
नीले आकाश में चाँदनी रात
समुद्र की गोद में उठती लहरें
कभी शांत, कभी उग्र, कभी मतवाली
धरती के किनारे नाचती हुई
सागर की गहराई में छिपे सपने
हर लहर एक कहानी, एक संगीत
कभी मुस्कुराती, कभी गरजती हुई
अनंत यात्रा में अपना राग गाती
अनंत लहरों का कोलाहल
नीले आकाश में चाँदनी रात
समुद्र की गोद में उठती लहरें
कभी शांत, कभी उग्र, कभी मतवाली
धरती के किनारे नाचती हुई
सागर की गहराई में छिपे सपने
हर लहर एक कहानी, एक संगीत
कभी मुस्कुराती, कभी गरजती हुई
अनंत यात्रा में अपना राग गाती