मित्रता का रंग
साथ में जब चलते हैं
बिन शब्दों के समझ जाते हैं
कभी हँसते, कभी रो लेते
पर एक दूसरे को छोड़ते नहीं
जैसे दो किनारे नदी के
जुड़े पर अलग-अलग
हर मुश्किल में साथ देते
हर खुशी में बाँट लेते
ये रिश्ता है जो चुनते नहीं
बस मिल जाता है अचानक
मन की गहराइयों से जुड़ा
एक अनमोल तोहफा सांझा