सुबह की चाय
धुंधली सी उषा में, पलकों के कोर पर
एक प्याली गरमा-गरम चाय
सुकून के घूंट, जैसे सपनों का संगीत
मन की धड़कन में मिलती जाय
भाप उठती, एलायची की महक
जागते हुए शहर की पहली सांस
चुस्की भर में छिपा है एक दुनिया
प्रेम, याद और नई उम्मीद का विश्वास
सुबह की चाय
धुंधली सी उषा में, पलकों के कोर पर
एक प्याली गरमा-गरम चाय
सुकून के घूंट, जैसे सपनों का संगीत
मन की धड़कन में मिलती जाय
भाप उठती, एलायची की महक
जागते हुए शहर की पहली सांस
चुस्की भर में छिपा है एक दुनिया
प्रेम, याद और नई उम्मीद का विश्वास