यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

हरी-भरी धरती की अनूठी कहानी
पत्तों में छुपी प्रकृति की जवानी

पहाड़ों पर बर्फ की चादर बिछी
नदियों में निर्मल जल की लहर मचती

फूलों की महक, पवन की सरसराहट
पेड़ों की डाली पर मीठी चहचहाहट

हर कोना सजा है प्रेम के रंगों से
सृष्टि सजी है प्रकृति के अंगों से