यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

हरी-भरी धरती की गोद में
फूल मुस्कुराते हैं मधुर स्वर में
पवन के साथ नाचती पत्तियाँ
जैसे कर रही हों जीवन की बयान

नदी बहती, पहाड़ मौन खड़े
सृष्टि के इस अद्भुत संगीत में
हर कण में छुपा है एक राज
प्रकृति की अनंत महिमा का साक्षी