मौन कमरे में बैठा हूँ
शब्द बिखरे हुए मेरे पैरों के पास
किसी अनकही दास्तान की तरह
दीवारें मुझे घेरती हैं
मेरी खामोशी की गवाह
एक कप चाय ठंडी होती है
मेरी उदासी के साथ
कभी-कभी सांसें भी
अकेलेपन से थक जाती हैं
मौन कमरे में बैठा हूँ
शब्द बिखरे हुए मेरे पैरों के पास
किसी अनकही दास्तान की तरह
दीवारें मुझे घेरती हैं
मेरी खामोशी की गवाह
एक कप चाय ठंडी होती है
मेरी उदासी के साथ
कभी-कभी सांसें भी
अकेलेपन से थक जाती हैं