प्रकृति की मुस्कान
हरी-हरी घास पर चाँदनी बिखरी
पत्तों में कुसुम की मधुर सरसराहट
पहाड़ों की गोद में बहती नदी
छुपाए अपने में अनंत कहानी
पीपल की डाली पर बैठा किसलय
गाता मधुर तान अपनी भाषा में
पवन के साथ नाचते पत्ते
मानो जीवन का उत्सव मनाते
प्रकृति की मुस्कान
हरी-हरी घास पर चाँदनी बिखरी
पत्तों में कुसुम की मधुर सरसराहट
पहाड़ों की गोद में बहती नदी
छुपाए अपने में अनंत कहानी
पीपल की डाली पर बैठा किसलय
गाता मधुर तान अपनी भाषा में
पवन के साथ नाचते पत्ते
मानो जीवन का उत्सव मनाते