यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

ऋतुओं का संगीत

बदलते मौसम की मधुर तान
कभी हरी, कभी सुनहरी जान

बसंत आती पल्लवों के साथ
गर्मी झुलसाती तपती रात

बारिश की फुहारें, मेघ गरजे
पतझड़ की पत्तियाँ धरती पर झरे

सर्दी में बर्फ की सफेद चादर
प्रकृति का अनोखा श्रृंगार

चार ऋतुएं, चार रंग अनूठे
जीवन के मौसम, पल-पल जुड़े