यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

तेरी याद के संग

तेरी याद की धारा में
बहता मौन मेरा श्वास
कभी मधुर, कभी तीव्र
प्रेम का अनकहा विलास

दूरियाँ सिर्फ मापती हैं
हमारे अंतर का अंतर
तू दूर, मैं यहाँ खड़ा
फिर भी एक, अविचल, अमर