यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

हरी-भरी डगर पर चलते हुए

पत्तों की सरसराहट, पवन की मीठी गान
नदी के किनारे खड़े, देखूँ प्रकृति का दीदार
हर पल एक अनूठा, हर श्वास में जीवन का बसेरा

पहाड़ों की ऊँची चोटियाँ, हरी-भरी घाटियाँ
बादलों के श्वेत वस्त्र, सूरज की सुनहरी चाँदनी
एक अद्भुत संगीत, जैसे प्रकृति का स्वर गाती