यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

प्रेम की डोर

तुम्हारी यादें बिखरी हवा में
छू जाती हैं मेरी सांसों को

दूर हो, फिर भी करीब महसूस
तुम्हारी धड़कन मेरे दिल में

कभी मुस्कुराहट, कभी आँसू
विरह की राह पर चलते हुए

प्रेम अधूरा, पर पूरा भी है
दूरी में भी नज़दीक हम दोनों