यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

हरी-भरी धरती का आँचल

सुबह की धुंध में खिले पत्ते
चमकते शीशम पर ओस के मोती
पहाड़ों की गोद में बहती नदी
गुनगुनाती एक मधुर कहानी

पीपल की शाखाएँ आकाश को छूतीं
पंछी गाते मीठे संगीत
हवा में महकता फूलों का स्वर
प्रकृति है एक अनमोल परिधान

सूरज की किरणें बिखेरती चाँदनी
धरती के गाल पर लाली भरी
यह सुंदर दृश्य, यह अनोखा तान
प्रकृति है जीवन का अनमोल वरदान