सुबह की चाय
उजाले की पहली चुस्की में
मेरी प्याली गर्म सपनों से भरी
धीरे-धीरे चाय की आह
जैसे जगाती है मेरी आत्मा को
एक घूंट, फिर एक घूंट
जीवन की थकान धुल जाती
चाय के साथ मिलते हैं
सुबह के कोमल स्पर्श
सुबह की चाय
उजाले की पहली चुस्की में
मेरी प्याली गर्म सपनों से भरी
धीरे-धीरे चाय की आह
जैसे जगाती है मेरी आत्मा को
एक घूंट, फिर एक घूंट
जीवन की थकान धुल जाती
चाय के साथ मिलते हैं
सुबह के कोमल स्पर्श