यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

अकेलेपन की धुंध

शब्द हैं मौन, कमरे में सन्नाटा
दीवारें चुपचाप मुझे निहारती

कभी एक पंछी भी नहीं आता
न कोई संगीत, न कोई बातें

उँगलियाँ ठंडी, कागज़ पर अकेली
लिखती हुई एक अनकही कहानी

सिर्फ परछाईं है मेरी साथी
मौन की गहराई में डूबी जवानी