अकेलेपन की धुंध
शब्द हैं मौन, कमरे में सन्नाटा
दीवारें चुपचाप मुझे निहारती
कभी एक पंछी भी नहीं आता
न कोई संगीत, न कोई बातें
उँगलियाँ ठंडी, कागज़ पर अकेली
लिखती हुई एक अनकही कहानी
सिर्फ परछाईं है मेरी साथी
मौन की गहराई में डूबी जवानी
अकेलेपन की धुंध
शब्द हैं मौन, कमरे में सन्नाटा
दीवारें चुपचाप मुझे निहारती
कभी एक पंछी भी नहीं आता
न कोई संगीत, न कोई बातें
उँगलियाँ ठंडी, कागज़ पर अकेली
लिखती हुई एक अनकही कहानी
सिर्फ परछाईं है मेरी साथी
मौन की गहराई में डूबी जवानी