यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

समुद्र की गोद में लहरें

नीले अनंत में उछलती लहरें
कभी शांत, कभी उग्र, कभी बेकरार
पीली रेत पर चूमती किनारे
नाचती हुई मुक्त और बेपरवाह

सफेद झọम में छिपा उनका राज
कभी मीठी, कभी तीव्र उनकी आवाज
समय के साथ झूलती, बदलती रीत
अनंत जल में उनकी अनोखी प्रीत