यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

प्रेम के पल

तेरी याद की धारा में
बह रहा हूँ अकेला
हर सांस में तेरा नाम
हर धड़कन में तेरा खेला

दूरियाँ बढ़ती जाती हैं
पर प्रेम सिकुड़ता नहीं
तू मेरे मन में बसी है
कोई फासला रुकता नहीं

आँखों में तेरी तस्वीर
दिल में तेरा संसार
प्रेम और विरह के बीच
मैं हूँ एक अधूरा पार