यहाँ एक कविता प्रस्तुत है बारिश के दिन पर:

बादल की गोद में

बादल छाए, मन मचलता
बूँदें गिरतीं, धरती दमकती
पत्तों पर थिरकती, नाचती हुई
एक संगीत अनकहा सजता

पानी के झरने बहते हुए
सड़कें चमकती, परछाईं डोलती
कागज की नाव में बचपन सजता
एक कोमल सपना मुस्कुराता