यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

अकेलेपन की परछाईं

शब्द हैं मौन, कमरे में सन्नाटा
दीवारें चुपचाप देखती मुझे
एक कोने में बैठा मैं
खामोशी से बुन रहा ख्याल

किसी की याद, किसी की आस
हवा में तैरते सपने अधूरे
आँखों में छुपी एक अजीब सी व्यथा
अकेलापन, मेरा एकमात्र साथी