यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

मित्रता

साथ के रंग, मन के तार
जुड़े हुए अटूट, बेकरार

कभी हँसी, कभी आँसू भरे
पर एक दूजे को संभालते हुए

शब्दों से परे, भावों के पार
मिलते हम, बिना किसी दीवार

ये रिश्ता जो चुनता नहीं कोई मापदंड
बस अपनापन, विश्वास का एक बंध