यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

मौन की गहराई में

शब्द नहीं, सिर्फ सन्नाटा
कमरे में बिखरी खामोशी
दीवारें साक्षी, मन अकेला
सुनता हर धड़कन की कहानी

कभी हँसता, कभी रोता
अपनी ही परछाईं से बातें
बिन बोले, बिन सुने
जीवन की अधूरी मुलाकातें