यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

नीले अंधेरे में चमकते सितारे
जैसे आँखें खोली हों आकाश के द्वारे

मौन रात की गोद में जगमगाते हुए
अपनी चाँदनी के तार बुनते हुए

कभी करीब, कभी दूर - चंचल दीपक से
टिमटिमाते हुए एक अनोखे रूप में

निःशब्द सम्वाद में रात से मिलते
शाश्वत रहस्यों के संकेत बोलते