यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

हरियाली का जादू

पत्तों में छिपी चुपके से कोयल,
मुस्कुराती हरी डगर पर चली

पहाड़ों की गोद में बहती नदी,
किरणों से चमकती नीली

कभी बारिश की मीठी फुहारें,
कभी सूरज की गर्म गली

प्रकृति तेरी हर सांस में छुपा,
एक अनमोल, अद्भुत खेली