अनंत नीला विस्तार
लहरें नाचती, गाती हुई
समुद्र की गोद में खेलती हुई
कभी मीठी, कभी क्रोधित
कभी शांत, कभी विचलित
नीले अंचल में उठती-गिरती
सपनों को छूती, किनारों को चूमती
अनंत की कहानी लिखती हुई
अपनी ही धुन में मदमाती हुई
अनंत नीला विस्तार
लहरें नाचती, गाती हुई
समुद्र की गोद में खेलती हुई
कभी मीठी, कभी क्रोधित
कभी शांत, कभी विचलित
नीले अंचल में उठती-गिरती
सपनों को छूती, किनारों को चूमती
अनंत की कहानी लिखती हुई
अपनी ही धुन में मदमाती हुई