यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

मित्रता

रिश्तों की डोर, जो बांधे अनोखे
हृदय के तार, जुड़े सरोखे

कभी हंसी, कभी आँसू बांटे
साथ चलें, जीवन के पाठ सजाते

बिन शब्दों के समझ लें एक-दूसरे को
छुपा लें अपने सपने, हर दुख-सोच को

मित्रता है वो कोमल डोर
जो जोड़े दिलों को, बिना कोई ज़ोर