यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

ऋतुओं का नृत्य

बदलते रंग, बदलती छटा
हर मौसम में नई कहानी
कभी हरी, कभी सुनहरी
प्रकृति की अनोखी बयानी

वसंत में कलियाँ मुस्काईं
गर्मी में धरती जली
बरसात में बादल गाए
शरद में पीले पत्ते डली

सर्दी की चादर ओढ़ धरती
फिर से जागी नई उमंग
हर ऋतु एक अलग संगीत
हर पल एक नया रंग