हरित छटा में खोए मन
पहाड़ों की गोद में सोई हरियाली
चमक रही है धरती की माली
पत्तों में छुपी वह मधुर सरसराहट
नदी के किनारे कुछ कह जाती बात
बादल भरे आकाश में बिखरी शांति
हवा में महकती प्रकृति की अनंत कांति
मौसम के रंग, फूलों की मुस्कान
प्रेम से भरा यह सृष्टि का अरमान