यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

तेरी यादों के पुल पर

तेरी यादें, जैसे बारिश की बूँदें
मेरी आँखों में छलकती हैं
दूर होकर भी पास महसूस करती हैं
तेरी स्मृतियाँ, मेरी सांसों में डलती हैं

कभी मुस्कुराहटें, कभी आँसू
विरह के इस सागर में डूबते
प्रेम के तार जुड़े, फिर भी अधूरे
मौन की धारा में बहते