काली रात की चादर में
चमकते सिलवरी तारे
जैसे बिखरे हुए हीरे
नीले आकाश के गहने
मौन मंदिर में टिमटिमाते
अपनी खामोश भाषा में
कुछ कहते, कुछ छुपाते
आँखें मूंदकर देखता हूँ
इन चमकदार बिंदुओं को
जो कहते हैं मौन कहानियाँ
अनंत के अंतर्गत पहेलियाँ
काली रात की चादर में
चमकते सिलवरी तारे
जैसे बिखरे हुए हीरे
नीले आकाश के गहने
मौन मंदिर में टिमटिमाते
अपनी खामोश भाषा में
कुछ कहते, कुछ छुपाते
आँखें मूंदकर देखता हूँ
इन चमकदार बिंदुओं को
जो कहते हैं मौन कहानियाँ
अनंत के अंतर्गत पहेलियाँ