यहाँ एक कविता प्रस्तुत है:

समुद्र की गोद में नाचती लहरें

नीले आकाश के नीचे, अनंत जल में
उठती-गिरती लहरें, करती क्रंदन
कभी मुस्कुराती, कभी गरजती हुई
अपनी कहानी सुनाती हुई

चट्टानों से टकराकर फेनिल होती
सफेद झाग में बदलती जाती
कभी शांत, कभी उग्र, कभी मधुर
समुद्र की सांसों में छुपी एक स्वर