खामोशी
शब की पार एजो कुछ है
वही मेेरसेहातें कहहता
न आवाज़, न इशारा
मौन की गहराई में सम्यारी थोंकही
जुुछ नहींक, सबकुताछता करता
धड ररछूई रएर
ंत र
सुनांरता के मधुृदय के Human्नलु,प की डार प्रच : Write a poem in दHindi about: who: सफर
खामोशी
शब की पार एजो कुछ है
वही मेेरसेहातें कहहता
न आवाज़, न इशारा
मौन की गहराई में सम्यारी थोंकही
जुुछ नहींक, सबकुताछता करता
धड ररछूई रएर
ंत र
सुनांरता के मधुृदय के Human्नलु,प की डार प्रच : Write a poem in दHindi about: who: सफर